हो के मायूस... न यूं शाम से ढलते रहिए !, ज़िंदगी भोर है... सूरज से निकलते रहिए !!
हो के मायूस... न यूं शाम से ढलते रहिए !, ज़िंदगी भोर है... सूरज से निकलते रहिए ! क्या खूब लिखा है कुंवर बैचेन साहब ने, तनाव भरे नाउम्मीदी के दौर में एकदम मौजू...!! Pradeep Joshi इंदौर. नीरज साहब के बाद जिन्हें सर्वाधिक सुना ओर पढ़ा जाता है उन कवियों में डॉ कुंवर बैचेन यानि कुंवर बहादुर सक्सेना का नाम अग्रणी है...। बैचेन साहब वैसे तो मुरादाबाद यूपी के गांव उमरी में पैदा हुए थे पर पूरे देश का हक...

हो के मायूस... न यूं शाम से ढलते रहिए !, ज़िंदगी भोर है... सूरज से निकलते रहिए ! क्या खूब लिखा है कुंवर बैचेन साहब ने, तनाव भरे नाउम्मीदी के दौर में एकदम मौजू...!! Pradeep Joshi इंदौर. नीरज साहब के बाद जिन्हें सर्वाधिक सुना ओर पढ़ा जाता है उन कवियों में डॉ कुंवर बैचेन यानि कुंवर बहादुर सक्सेना का नाम अग्रणी है...। बैचेन साहब वैसे तो मुरादाबाद यूपी के गांव उमरी में पैदा हुए थे पर पूरे देश का हक...
Source: Paliwalwani
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