स्वतंत्रता तभी सुनिश्चित की जा सकती है जब न्यायाधिकरणों को अपने कार्य करने के लिए कार्यपालिका के कंधों का सहारा न लेना पड़े
एक न्यायाधिकरण, जो अपने आप में पूर्ण है आर्टिकल,एन. वेंकटरमण,भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (उच्चतम न्यायालय) हमारे सार्वजनिक अधिनियमों में न्यायाधिकरणों के गठन से जुड़े कुछ ही प्रश्न ऐसे हैं, जिनकी इतनी बार पुनर्समीक्षा हुई है। 1987 के एस. पी. संपत कुमार मामले से लेकर नवंबर 2025 में मद्रास बार एसोसिएशन से संबंधित निर्णय तक, न्यायालयों ने कानून निरस्त किये, निर्देश जारी किए और फिर उसी आधार पर स्वयं को नए कानूनों की समीक्षा करते हुए पाया। यह विषय इतने चक्र से गुजरा है, जो अपने आप में दर्शाता है क

एक न्यायाधिकरण, जो अपने आप में पूर्ण है आर्टिकल,एन. वेंकटरमण,भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (उच्चतम न्यायालय) हमारे सार्वजनिक अधिनियमों में न्यायाधिकरणों के गठन से जुड़े कुछ ही प्रश्न ऐसे हैं, जिनकी इतनी बार पुनर्समीक्षा हुई है। 1987 के एस. पी. संपत कुमार मामले से लेकर नवंबर 2025 में मद्रास बार एसोसिएशन से संबंधित निर्णय तक, न्यायालयों ने कानून निरस्त किये, निर्देश जारी किए और फिर उसी आधार पर स्वयं को नए कानूनों की समीक्षा करते हुए पाया। यह विषय इतने चक्र से गुजरा है, जो अपने आप में दर्शाता है क
Source: असल बात (asal Baat)
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