सीने में लगीं 12 गोलियां, फिर भी जीता ‘टाइगर हिल्स’:सामने ‘सरमन’ की पार्थिव देह रखी थी; चिट्ठी में लिखा था- मैं कुशल से हूं
चार बेटियों के बाद जन्मे इकलौते बेटे और घर के सबसे लाड़ले, जिन्हें पूरा परिवार प्यार से ‘लल्लू’ कहता था। देश ने पुकारा तो लल्लू ने 17 साल की उम्र में बिना बताए सेना में भर्ती होने का फैसला कर लिया। 19 साल बाद कारगिल की जंग में टाइगर हिल पर तिरंगा फहराने का मौका मिला तो उन्होंने अपने घाव तक छिपा लिए। दुश्मन की गोलियां शरीर को छलनी करती रहीं, लेकिन कदम पीछे नहीं हटे। 28 जून 1999 को टाइगर हिल पर तिरंगा फहराने के बाद ग्वालियर का यह सपूत शहीद हो गया। मेडिकल जांच में शरीर से 12 गोलियां निकली थीं। यह क
चार बेटियों के बाद जन्मे इकलौते बेटे और घर के सबसे लाड़ले, जिन्हें पूरा परिवार प्यार से ‘लल्लू’ कहता था। देश ने पुकारा तो लल्लू ने 17 साल की उम्र में बिना बताए सेना में भर्ती होने का फैसला कर लिया। 19 साल बाद कारगिल की जंग में टाइगर हिल पर तिरंगा फहराने का मौका मिला तो उन्होंने अपने घाव तक छिपा लिए। दुश्मन की गोलियां शरीर को छलनी करती रहीं, लेकिन कदम पीछे नहीं हटे। 28 जून 1999 को टाइगर हिल पर तिरंगा फहराने के बाद ग्वालियर का यह सपूत शहीद हो गया। मेडिकल जांच में शरीर से 12 गोलियां निकली थीं। यह क
Source: Bhaskar
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