सीएचसी-पीएचसी का सिस्टम फेल:100 बेड की विंग में 246 बेड संचालित इनमें स्त्री रोग विभाग के 152, गैलरी में इलाज की मजबूरी
प्रसव की असहनीय पीड़ा से गुजरती एक गर्भवती महिला जब जिला अस्पताल पहुंचती है, तो उसे सबसे ज्यादा जरूरत एक सुरक्षित और सुकून भरे बिस्तर की होती है। लेकिन बाड़मेर जिला अस्पताल के मातृ एवं शिशु विंग की गैलरियों में गद्दे बिछे हैं। एक-एक बेड पर दो-दो प्रसूताएं लेटी हैं। जिला अस्पताल में पिछले 5 महीने 4653 प्रसव इनमें 1362 सिजेरियन से हुए। 3,291 नॉर्मल डिलीवरी की गई। लाखों खर्च कर गांवों में बनाई गई सीएचसी और पीएचसी खोखली साबित हो रही हैं। वहां न प्रसूताओं की ढंग से जांच हो रही है। न ही सामान्य डिलीवर
प्रसव की असहनीय पीड़ा से गुजरती एक गर्भवती महिला जब जिला अस्पताल पहुंचती है, तो उसे सबसे ज्यादा जरूरत एक सुरक्षित और सुकून भरे बिस्तर की होती है। लेकिन बाड़मेर जिला अस्पताल के मातृ एवं शिशु विंग की गैलरियों में गद्दे बिछे हैं। एक-एक बेड पर दो-दो प्रसूताएं लेटी हैं। जिला अस्पताल में पिछले 5 महीने 4653 प्रसव इनमें 1362 सिजेरियन से हुए। 3,291 नॉर्मल डिलीवरी की गई। लाखों खर्च कर गांवों में बनाई गई सीएचसी और पीएचसी खोखली साबित हो रही हैं। वहां न प्रसूताओं की ढंग से जांच हो रही है। न ही सामान्य डिलीवर
Source: Bhaskar
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