संत की सीख:समस्या को जीवन का स्वाभाविक हिस्सा मानना चाहिए, जब यह बात जीवन में उतार लेंगे, तो मानसिक तनाव कम होने लगेगा
एक प्रचलित लोक कथा के अनुसार, पुराने समय में एक व्यक्ति अपने जीवन से बहुत परेशान था। उसे लगता था कि उसके जीवन में केवल दुख ही दुख हैं। रोज सुबह वह नई चिंता के साथ जागता और हर शाम निराश होकर दिन समाप्त करता। उसे विश्वास हो गया था कि जब तक उसकी सभी परेशानियां खत्म नहीं होंगी, तब तक उसे सच्ची खुशी नहीं मिल सकती। एक दिन उसके नगर में एक संत आए। दूर-दूर से लोग उनके दर्शन करने और अपनी समस्याओं का समाधान पूछने पहुंचे। वह व्यक्ति भी बड़ी उम्मीद लेकर संत के पास पहुंचा। अवसर मिलने पर उसने विनम्रता से कहा,
एक प्रचलित लोक कथा के अनुसार, पुराने समय में एक व्यक्ति अपने जीवन से बहुत परेशान था। उसे लगता था कि उसके जीवन में केवल दुख ही दुख हैं। रोज सुबह वह नई चिंता के साथ जागता और हर शाम निराश होकर दिन समाप्त करता। उसे विश्वास हो गया था कि जब तक उसकी सभी परेशानियां खत्म नहीं होंगी, तब तक उसे सच्ची खुशी नहीं मिल सकती। एक दिन उसके नगर में एक संत आए। दूर-दूर से लोग उनके दर्शन करने और अपनी समस्याओं का समाधान पूछने पहुंचे। वह व्यक्ति भी बड़ी उम्मीद लेकर संत के पास पहुंचा। अवसर मिलने पर उसने विनम्रता से कहा,
Source: Bhaskar
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