संग्रहालय नहीं, संगीत महसूस करने वाला केंद्र:सामवेद से तानसेन तक... 5000 साल की संगीत यात्रा अब सिर्फ सुनेंगे नहीं, देखी और महसूस की जा सकेगी...
ग्वालियर मोती महल में आकार ले रहा देश का पहला म्यूजियम ऑफ म्यूजिक हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में सामवेद के मंत्रों से जन्मे सुर, ग्वालियर घराने की परंपरा, तानसेन और बैजू बावरा की अमर विरासत अब एक ही स्थान पर देखी, सुनी और महसूस की जा सकेगी। यूनेस्को से सिटी ऑफ म्यूजिक का दर्जा प्राप्त कर चुके ग्वालियर के मोती महल में 25 करोड़ रुपए की लागत से देश का अपनी तरह का पहला म्यूजियम ऑफ म्यूजिक बनाया जा रहा है। दैनिक भास्कर पहली बार अपने पाठकों के लिए इस अनूठे म्यूजियम की गैलरियों और इंटीरियर डिजाइन की ए
ग्वालियर मोती महल में आकार ले रहा देश का पहला म्यूजियम ऑफ म्यूजिक हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में सामवेद के मंत्रों से जन्मे सुर, ग्वालियर घराने की परंपरा, तानसेन और बैजू बावरा की अमर विरासत अब एक ही स्थान पर देखी, सुनी और महसूस की जा सकेगी। यूनेस्को से सिटी ऑफ म्यूजिक का दर्जा प्राप्त कर चुके ग्वालियर के मोती महल में 25 करोड़ रुपए की लागत से देश का अपनी तरह का पहला म्यूजियम ऑफ म्यूजिक बनाया जा रहा है। दैनिक भास्कर पहली बार अपने पाठकों के लिए इस अनूठे म्यूजियम की गैलरियों और इंटीरियर डिजाइन की ए
Source: Bhaskar
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