विनय सिंह बैस कि कलम से - 'हईदराबाद!
विनय सिंह बैस, नई दिल्ली। तांबरम (चेन्नई) में प्रशिक्षण के दौरान पूरे दो वर्ष तक बंदिशों और कठोर अनुशासन में रहने के बाद जिस शहर में पहली बार मैंने खुलकर सांस ली, उस शहर का नाम हईदराबाद है। जिस शहर में जी भरकर जिया, खूब घूमा, दोस्तों के साथ भरपूर मस्ती की और शहर का हर एक कोना, चप्पा-चप्पा छान मारा, उस शहर का नाम हईदराबाद है। जिस शहर के बिरला मंदिर, गोलकुंडा फोर्ट, हुसैन सागर झील और उसमें स्थापित बुद्ध की विशाल मूर्ति, ढोला री ढाणी, सालार जंग म्यूजियम, रामोजी फिल्म सिटी, एनटीआर गार्डन, सेंसेशन मू

विनय सिंह बैस, नई दिल्ली। तांबरम (चेन्नई) में प्रशिक्षण के दौरान पूरे दो वर्ष तक बंदिशों और कठोर अनुशासन में रहने के बाद जिस शहर में पहली बार मैंने खुलकर सांस ली, उस शहर का नाम हईदराबाद है। जिस शहर में जी भरकर जिया, खूब घूमा, दोस्तों के साथ भरपूर मस्ती की और शहर का हर एक कोना, चप्पा-चप्पा छान मारा, उस शहर का नाम हईदराबाद है। जिस शहर के बिरला मंदिर, गोलकुंडा फोर्ट, हुसैन सागर झील और उसमें स्थापित बुद्ध की विशाल मूर्ति, ढोला री ढाणी, सालार जंग म्यूजियम, रामोजी फिल्म सिटी, एनटीआर गार्डन, सेंसेशन मू
Source: Kolkata Hindi News
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