विज्ञान संचार के बदलते परिदृश्य में नई दिशा : CSIR-NIScPR ने ‘विज्ञान संचार और उभरते रुझान’ पर आयोजित किया दो दिवसीय राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम
विज्ञान और समाज के बीच प्रभावी संवाद स्थापित करना आज केवल एक शैक्षणिक आवश्यकता नहीं, बल्कि वैज्ञानिक विकास को जन-आंदोलन का स्वरूप देने की अनिवार्य शर्त बन चुका है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल मीडिया, सोशल प्लेटफॉर्म और बदलती सूचना संस्कृति के इस दौर में विज्ञान संचार की भूमिका पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक और उत्तरदायित्वपूर्ण हो गई है। इसी दृष्टि को केंद्र में रखते हुए CSIR-राष्ट्रीय विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान संस्थान (CSIR-NIScPR), नई दिल्ली ने CSIR एकीकृत कौशल पहल (चरण-III) के अ

विज्ञान और समाज के बीच प्रभावी संवाद स्थापित करना आज केवल एक शैक्षणिक आवश्यकता नहीं, बल्कि वैज्ञानिक विकास को जन-आंदोलन का स्वरूप देने की अनिवार्य शर्त बन चुका है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल मीडिया, सोशल प्लेटफॉर्म और बदलती सूचना संस्कृति के इस दौर में विज्ञान संचार की भूमिका पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक और उत्तरदायित्वपूर्ण हो गई है। इसी दृष्टि को केंद्र में रखते हुए CSIR-राष्ट्रीय विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान संस्थान (CSIR-NIScPR), नई दिल्ली ने CSIR एकीकृत कौशल पहल (चरण-III) के अ
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