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विचार: औपनिवेशिक छाप से मुक्त हो शिक्षा
भारतीय मनीषा और अवधारणाओं को सहज प्रासंगिक रूप से शिक्षा में शामिल करना होगा कि वे अतिरिक्त भार न बनकर हमारी आवश्यकताओं एवं चुनौतियों का सामना करने में हमें समर्थ बना सकें।
digital desk8 Jun 2026, 16:25👁 0 views

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भारतीय मनीषा और अवधारणाओं को सहज प्रासंगिक रूप से शिक्षा में शामिल करना होगा कि वे अतिरिक्त भार न बनकर हमारी आवश्यकताओं एवं चुनौतियों का सामना करने में हमें समर्थ बना सकें।
Source: Jagran
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