लंदन से लौटकर गांवों में खोजी अपनी पहचान, हबीब तनवीर ने लोक कलाकारों को दुनिया के मंच तक पहुंचाया
मुंबई, 7 जून (आईएएनएस)। भारतीय थिएटर की बात जब भी होती है, तो हबीब तनवीर का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। विदेश में आधुनिक रंगमंच की पढ़ाई करने के बाद लोगों को लगा कि वह पश्चिमी शैली के थिएटर को आगे बढ़ाने के लिए काम करेंगे, लेकिन उन्होंने अपनी असली ताकत भारत के गांवों और लोक कलाकारों में खोजने में लगा दी। यही सोच उन्हें बाकी रंगकर्मियों से अलग बनाती है। 8 जून 2009 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन उनकी बनाई हुई रंग परंपरा आज भी जीवित है

मुंबई, 7 जून (आईएएनएस)। भारतीय थिएटर की बात जब भी होती है, तो हबीब तनवीर का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। विदेश में आधुनिक रंगमंच की पढ़ाई करने के बाद लोगों को लगा कि वह पश्चिमी शैली के थिएटर को आगे बढ़ाने के लिए काम करेंगे, लेकिन उन्होंने अपनी असली ताकत भारत के गांवों और लोक कलाकारों में खोजने में लगा दी। यही सोच उन्हें बाकी रंगकर्मियों से अलग बनाती है। 8 जून 2009 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन उनकी बनाई हुई रंग परंपरा आज भी जीवित है
Source: Samacharnama
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