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महाराष्ट्रनामा : बोली, बखेड़ा और बेशर्मी का लोकतांत्रिक उत्सव!
राजन पारकर ‘जहां विचारों की नहीं, इशारों की कीमत लगती है; जहां निष्ठा की नहीं, निविदा की चर्चा होती है, वहां लोकतंत्र नहीं, राजनीतिक मंडी लगती है!’ गीते ने खोल दी सत्ता के सौदागरों की दुकान नासिक की विधान परिषद सीट पर चुनाव कम और समझौते की पंचायत ज्यादा दिखाई दे रही है। गोकुल गीते [...]
Hindisaamana10 Jun 2026, 18:47👁 0 views

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राजन पारकर ‘जहां विचारों की नहीं, इशारों की कीमत लगती है; जहां निष्ठा की नहीं, निविदा की चर्चा होती है, वहां लोकतंत्र नहीं, राजनीतिक मंडी लगती है!’ गीते ने खोल दी सत्ता के सौदागरों की दुकान नासिक की विधान परिषद सीट पर चुनाव कम और समझौते की पंचायत ज्यादा दिखाई दे रही है। गोकुल गीते [...]
Source: Hindisaamana
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