ब्लैकबोर्ड-मुझे लड़कियां पसंद थी, इसलिए मेरी सलवार उतारकर चेक किया:स्कूल में लड़के कहते- लड़कियों के टॉयलेट में क्यो जाता है, बॉयज टॉयलेट में चल
मैं आठवीं क्लास में था। नाम था अंकिता यादव। मेरे ही क्लास के दूसरे सेक्शन में प्रिया नाम की एक लड़की थी। बहुत पसंद थी वो मुझे। जब भी वो आस-पास होती मुझे अजीब सा महसूस होता। बस लगता कि उसे देखता रहूं। उससे बातें करूं। अब आप सोच रहे होंगे मेरा नाम लड़कियों जैसा, लेकिन बातें तो लड़कों जैसी हैं। सही सोचा आपने। हां, तब मैं शरीर से तो लड़की था, लेकिन मेरे भीतर एक लड़का था। भीतर का वो लड़का हमेशा घुटता रहता। मैं खुद से पूछता, दुनिया के लिए तो मैं लड़की हूं, ऐसे में जिस लड़की से प्यार करता हूं, उसे ये क
मैं आठवीं क्लास में था। नाम था अंकिता यादव। मेरे ही क्लास के दूसरे सेक्शन में प्रिया नाम की एक लड़की थी। बहुत पसंद थी वो मुझे। जब भी वो आस-पास होती मुझे अजीब सा महसूस होता। बस लगता कि उसे देखता रहूं। उससे बातें करूं। अब आप सोच रहे होंगे मेरा नाम लड़कियों जैसा, लेकिन बातें तो लड़कों जैसी हैं। सही सोचा आपने। हां, तब मैं शरीर से तो लड़की था, लेकिन मेरे भीतर एक लड़का था। भीतर का वो लड़का हमेशा घुटता रहता। मैं खुद से पूछता, दुनिया के लिए तो मैं लड़की हूं, ऐसे में जिस लड़की से प्यार करता हूं, उसे ये क
Source: Bhaskar
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