बाल-जीवन की धड़कनों को स्वर देती कविताएँ : ‘नींद हुआ मैं तुमसे गुस्सा’
हिंदी बालसाहित्य में ऐसी रचनाओं का विशेष महत्व है, जो बच्चों की दुनिया को उनकी अपनी दृष्टि से समझते हुए सहज, सरस और कल्पनाशील अभिव्यक्ति प्रदान करें। बालक के मन की जिज्ञासाओं, उसकी कल्पना, संवेदनाओं, खेल, प्रश्नों और अनुभवों को यदि कविता स्वाभाविक ढंग से स्वर देती है, तभी वह बालसाहित्य की कसौटी पर खरी उतरती है। The post बाल-जीवन की धड़कनों को स्वर देती कविताएँ : ‘नींद हुआ मैं तुमसे गुस्सा’ first appeared on AVK NEWS SERVICES .

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