पत्नी और बच्चों का हाईकोर्ट ने बढ़ाया गुजारा भत्ता:हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश संशोधित किया, कहा-जरूरत पर ध्यान दें
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि भरण-पोषण तय करने के मामलों में अदालतों को तकनीकी आधार पर नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और आश्रितों की गरिमापूर्ण जीवन-यापन की जरूरतों को ध्यान में रखकर निर्णय देना चाहिए। न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की एकल पीठ ने बुलंदशहर फैमिली कोर्ट के आदेश को आंशिक रूप से निरस्त करते हुए पत्नी और दो नाबालिग बच्चों के भरण-पोषण की राशि बढ़ा दी। मामले में फैमिली कोर्ट ने पत्नी को भरण-पोषण देने से इनकार कर दिया था और दोनों बच्चों को केवल 3-3 हजार रुपये प्रतिमाह देने का आदेश दिया था। इस आदे
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि भरण-पोषण तय करने के मामलों में अदालतों को तकनीकी आधार पर नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और आश्रितों की गरिमापूर्ण जीवन-यापन की जरूरतों को ध्यान में रखकर निर्णय देना चाहिए। न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की एकल पीठ ने बुलंदशहर फैमिली कोर्ट के आदेश को आंशिक रूप से निरस्त करते हुए पत्नी और दो नाबालिग बच्चों के भरण-पोषण की राशि बढ़ा दी। मामले में फैमिली कोर्ट ने पत्नी को भरण-पोषण देने से इनकार कर दिया था और दोनों बच्चों को केवल 3-3 हजार रुपये प्रतिमाह देने का आदेश दिया था। इस आदे
Source: Bhaskar
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