दर्शन का असली मैदान: तालियां नहीं, सार्वजनिक परीक्षा
मेरी ब्रिटेन यात्रा प्रवचनों की नहीं, बल्कि विचारों की परीक्षा की यात्रा थी। कैंब्रिज, LSE, UCL और अन्य संस्थानों में वैज्ञानिकों व शिक्षाविदों के साथ हुए संवाद में मैंने वेदांत, अहंकार और आत्म-अन्वेषण के विचारों को कठोर सवालों के सामने रखा। मेरा मानना है कि अध्यात्म की सफलता भीड़ या अनुयायियों से नहीं, बल्कि इस बात से तय होती है कि कोई विचार तर्क, प्रमाण और आलोचनात्मक जांच की कसौटी पर कितना टिकता है।
मेरी ब्रिटेन यात्रा प्रवचनों की नहीं, बल्कि विचारों की परीक्षा की यात्रा थी। कैंब्रिज, LSE, UCL और अन्य संस्थानों में वैज्ञानिकों व शिक्षाविदों के साथ हुए संवाद में मैंने वेदांत, अहंकार और आत्म-अन्वेषण के विचारों को कठोर सवालों के सामने रखा। मेरा मानना है कि अध्यात्म की सफलता भीड़ या अनुयायियों से नहीं, बल्कि इस बात से तय होती है कि कोई विचार तर्क, प्रमाण और आलोचनात्मक जांच की कसौटी पर कितना टिकता है।
Source: Nbt Navbharattimes
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