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कावड़ बनी पालकी, कंधों पर बैठे माता-पिता... 22 किमी पैदल चलकर बेटों-बहुओं ने रच दी श्रवण कुमार वाली गाथा
कावड़ बनी पालकी, कंधों पर बैठे माता-पिता... 22 किमी पैदल चलकर बेटों-बहुओं ने रच दी श्रवण कुमार वाली गाथा। उझानी-बदांयू 16 अगस्त। सावन की पावन बयार में जब पूरा देश “बम-बम भोले” के जयकारों से गूंज रहा है, तब उझानी क्षेत्र के एक गांव ने मानवता और संस्कारों की ऐसी मिसाल कायम की है जिसे ...
bdn india16 Aug 2026, 11:01👁 0 views

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कावड़ बनी पालकी, कंधों पर बैठे माता-पिता... 22 किमी पैदल चलकर बेटों-बहुओं ने रच दी श्रवण कुमार वाली गाथा। उझानी-बदांयू 16 अगस्त। सावन की पावन बयार में जब पूरा देश “बम-बम भोले” के जयकारों से गूंज रहा है, तब उझानी क्षेत्र के एक गांव ने मानवता और संस्कारों की ऐसी मिसाल कायम की है जिसे ...
Source: Badaunexpress.com
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