कथा: संत की क्रोधी व्यक्ति को सीख:गुस्सा आने पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय कुछ क्षण रुकें, यही छोटा-सा विराम बड़े विवाद को टाल सकता है
क्रोध इंसान का ऐसा शत्रु है, जो पलभर में करीबी रिश्तों को भी तोड़ सकता है। गुस्से में कहे गए शब्द अक्सर मन पर ऐसे घाव दे जाते हैं, जो समय बीतने पर भी नहीं भरते। इसलिए कहा गया है कि अगर कोई हमारी आलोचना करे या अपमानित करने का प्रयास करे, तब भी धैर्य और मौन सबसे बड़ा उत्तर होते हैं। यह बात एक लोक कथा से समझ सकते हैं... बहुत समय पहले एक संत थे, जो अपने शांत और सरल स्वभाव के लिए प्रसिद्ध थे। उन्होंने जीवन में कभी किसी पर क्रोध नहीं किया था। उनके आश्रम में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग प्रवचन सुनने आत
क्रोध इंसान का ऐसा शत्रु है, जो पलभर में करीबी रिश्तों को भी तोड़ सकता है। गुस्से में कहे गए शब्द अक्सर मन पर ऐसे घाव दे जाते हैं, जो समय बीतने पर भी नहीं भरते। इसलिए कहा गया है कि अगर कोई हमारी आलोचना करे या अपमानित करने का प्रयास करे, तब भी धैर्य और मौन सबसे बड़ा उत्तर होते हैं। यह बात एक लोक कथा से समझ सकते हैं... बहुत समय पहले एक संत थे, जो अपने शांत और सरल स्वभाव के लिए प्रसिद्ध थे। उन्होंने जीवन में कभी किसी पर क्रोध नहीं किया था। उनके आश्रम में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग प्रवचन सुनने आत
Source: Bhaskar
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