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आत्मनिर्भर भारत की बड़ी छलांग: माइनस 42 डिग्री तापमान में भी नहीं जमेगा डीजल; भारतीय सेना और BPCL ने तैयार किया 'एक्सट्रीम वेदर ग्रेड' ईंधन

नई दिल्ली। भारतीय सेना दुनिया के सबसे दुर्गम और चुनौतीपूर्ण इलाकों में तैनात रहती है। माइनस 50 डिग्री से लेकर प्लस 50 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में सेना अपने भारी हथियारों और सैन्य साजो-सामान के साथ देश की सीमाओं की रक्षा करती है। ऐसे में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक हाई-एल्टीट्यूड क्षेत्रों में सैन्य वाहनों का ऑपरेशन होता है। लद्दाख, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे इलाकों में भारतीय सेना के टैंक, बख्तरबंद वाहन और अन्य सैन्य गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाला सामान्य डीजल अत्यधिक कम तापमान में ज

अर्चना सिंह | online news editor31 Jul 2026, 09:15👁 0 views
आत्मनिर्भर भारत की बड़ी छलांग: माइनस 42 डिग्री तापमान में भी नहीं जमेगा डीजल; भारतीय सेना और BPCL ने तैयार किया 'एक्सट्रीम वेदर ग्रेड' ईंधन
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नई दिल्ली। भारतीय सेना दुनिया के सबसे दुर्गम और चुनौतीपूर्ण इलाकों में तैनात रहती है। माइनस 50 डिग्री से लेकर प्लस 50 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में सेना अपने भारी हथियारों और सैन्य साजो-सामान के साथ देश की सीमाओं की रक्षा करती है। ऐसे में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक हाई-एल्टीट्यूड क्षेत्रों में सैन्य वाहनों का ऑपरेशन होता है। लद्दाख, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे इलाकों में भारतीय सेना के टैंक, बख्तरबंद वाहन और अन्य सैन्य गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाला सामान्य डीजल अत्यधिक कम तापमान में ज

Source: रॉयल बुलेटिन

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