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Opinion | बारिश नहीं, कुप्रबंधन है असली गुनहगार: आखिर हर मानसून में क्यों डूब जाते हैं भारत के शहर?
बलवंत राज मेहता अपने इस लेख में बता रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन ने कई चुनौतियों को और कठिन बना दिया है। अब वर्षा का स्वरूप बदल गया है। पहले जो पानी कई दिनों में गिरता था, वह अब कुछ घंटों में गिर जाता है। ऐसे में पचास-साठ वर्ष पुराने मानकों पर बनी सीवर व्यवस्था ध्वस्त हो जाती है।
जनसत्ता16 Jul 2026, 21:29👁 0 views

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बलवंत राज मेहता अपने इस लेख में बता रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन ने कई चुनौतियों को और कठिन बना दिया है। अब वर्षा का स्वरूप बदल गया है। पहले जो पानी कई दिनों में गिरता था, वह अब कुछ घंटों में गिर जाता है। ऐसे में पचास-साठ वर्ष पुराने मानकों पर बनी सीवर व्यवस्था ध्वस्त हो जाती है।
Source: Jansatta
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