Kanwar Yatra 2026: 30 जुलाई से 'बम-बम भोले' की गूंज, जानें इस Holy Journey का धार्मिक महत्व
सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही भगवान शिव के भक्तों की सबसे बड़ी और धार्मिक कांवड़ यात्रा शुरू हो जाती है। पूरे उत्तर भारत में केसरिया वस्त्र पहने लाखों की संख्या में श्रद्धालु गंगाजल भरने के लिए हरिद्वार, ऋषिकेश, गोमुख और अन्य पवित्र नदियों के तटों पर पहुंचने के लिए पैदल यात्रा करते हैं। इस दौरान भक्त अपने कंधों पर कांवड़ लेकर हर-हर महादेव के जयकारों के साथ सैकड़ों किमी की यात्रा करके स्थानीय शिव मंदिरों में पहुंचकर जलाभिषेक करते हैं। तो आइए जानते हैं कांवड़ यात्रा कब से शुरू हो रही है और यह

सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही भगवान शिव के भक्तों की सबसे बड़ी और धार्मिक कांवड़ यात्रा शुरू हो जाती है। पूरे उत्तर भारत में केसरिया वस्त्र पहने लाखों की संख्या में श्रद्धालु गंगाजल भरने के लिए हरिद्वार, ऋषिकेश, गोमुख और अन्य पवित्र नदियों के तटों पर पहुंचने के लिए पैदल यात्रा करते हैं। इस दौरान भक्त अपने कंधों पर कांवड़ लेकर हर-हर महादेव के जयकारों के साथ सैकड़ों किमी की यात्रा करके स्थानीय शिव मंदिरों में पहुंचकर जलाभिषेक करते हैं। तो आइए जानते हैं कांवड़ यात्रा कब से शुरू हो रही है और यह
Source: Prabhasakshi
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