Effort Recession in Corporate Sector: क्या है 'एफर्ट रिसेशन'? काम सिर्फ उतना ही जितने के पैसे; भारतीय कंपनियों में क्यों खत्म हो रहा है एक्स्ट्रा काम करने का ट्रेंड?
भारतीय कॉर्पोरेट जगत (Corporate Sector) में इन दिनों एक नया और चौंकाने वाला वर्क कल्चर तेजी से पैर पसार रहा है। अब कर्मचारी दफ्तर आते हैं, अपनी डेस्क संभालते हैं, सिर्फ उतना ही काम करते हैं जितना उनके कॉन्ट्रैक्ट या जॉब डिस्क्रिप्शन (JD) में लिखा है, और समय होते ही लॉग-ऑफ कर देते हैं—न एक मिनट कम, न एक मिनट ज्यादा। मैनेजमेंट और एचआर की भाषा में इस नए ट्रेंड को 'एफर्ट रिसेशन' (Effort Recession यानी प्रयासों में मंदी) का नाम दिया गया है, जिसने देश की बड़ी-बड़ी कंपनियों के कप्तानों की नींद उड़ा दी

भारतीय कॉर्पोरेट जगत (Corporate Sector) में इन दिनों एक नया और चौंकाने वाला वर्क कल्चर तेजी से पैर पसार रहा है। अब कर्मचारी दफ्तर आते हैं, अपनी डेस्क संभालते हैं, सिर्फ उतना ही काम करते हैं जितना उनके कॉन्ट्रैक्ट या जॉब डिस्क्रिप्शन (JD) में लिखा है, और समय होते ही लॉग-ऑफ कर देते हैं—न एक मिनट कम, न एक मिनट ज्यादा। मैनेजमेंट और एचआर की भाषा में इस नए ट्रेंड को 'एफर्ट रिसेशन' (Effort Recession यानी प्रयासों में मंदी) का नाम दिया गया है, जिसने देश की बड़ी-बड़ी कंपनियों के कप्तानों की नींद उड़ा दी
Source: Ni News India
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