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Agriculture News: अब नहीं पड़ेगी मजदूरों की जरूरत... नागौर के किसान 'हळनी' से आधे समय में कर रहे निराई

Nagaur Agriculture News: नागौर जिले के करीब 50 से 60 प्रतिशत खरीफ क्षेत्र में किसान पारंपरिक मजदूरी और रासायनिक दवाओं को छोड़कर ट्रैक्टर कल्टीवेटर यानी 'हळनी' से निराई-गुड़ाई कर रहे हैं. मेड़ता, डेगाना और जायल के काली मिट्टी वाले क्षेत्रों में बाजरा, मूंग और मूंगफली की फसलों में यह तकनीक बेहद कारगर है. जहां हाथ से निराई में 30 हजार का खर्च आता है, वहीं हळनी से यह काम मात्र 1000 रुपए के डीजल में हो जाता है, जिससे प्रति बीघा 1500 रुपए तक की बचत हो रही है.

dipendra kumawat18 Jul 2026, 07:38👁 0 views
Agriculture News: अब नहीं पड़ेगी मजदूरों की जरूरत... नागौर के किसान 'हळनी' से आधे समय में कर रहे निराई
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Nagaur Agriculture News: नागौर जिले के करीब 50 से 60 प्रतिशत खरीफ क्षेत्र में किसान पारंपरिक मजदूरी और रासायनिक दवाओं को छोड़कर ट्रैक्टर कल्टीवेटर यानी 'हळनी' से निराई-गुड़ाई कर रहे हैं. मेड़ता, डेगाना और जायल के काली मिट्टी वाले क्षेत्रों में बाजरा, मूंग और मूंगफली की फसलों में यह तकनीक बेहद कारगर है. जहां हाथ से निराई में 30 हजार का खर्च आता है, वहीं हळनी से यह काम मात्र 1000 रुपए के डीजल में हो जाता है, जिससे प्रति बीघा 1500 रुपए तक की बचत हो रही है.

Source: News 18 Hindi

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