वृंदावन में कथा सीखी, मंदिर पर कब्जा किया:कथावाचक ने युवक से कुकृत्य कर हत्या की; चाचा-भाई के साथ मिलकर शव ठिकाने लगाया था
मेरा और पत्नी का पशुपतिनाथ का उपवास था। घर में नॉनवेज नहीं बन रहा था। बेटे को पसंद था इसलिए उसके लिए बाजार से पनीर लाया था। सब्जी बन रही थी लेकिन वह उसे खाने घर लौट ही नहीं पाया। यह दर्द उस पिता का है, जिसने अपने इकलौते बेटे को एक ऐसे शख्स की हवस का शिकार होने की वजह से खो दिया, जिसे लोग धर्मगुरु और कथावाचक मानकर सम्मान देते थे। 10 जून की रात छिंदवाड़ा में दमुआ के हनुमानगढ़ मंदिर के भीतर जो हुआ, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। दैनिक भास्कर को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, खुद को ‘शर्मा मह
मेरा और पत्नी का पशुपतिनाथ का उपवास था। घर में नॉनवेज नहीं बन रहा था। बेटे को पसंद था इसलिए उसके लिए बाजार से पनीर लाया था। सब्जी बन रही थी लेकिन वह उसे खाने घर लौट ही नहीं पाया। यह दर्द उस पिता का है, जिसने अपने इकलौते बेटे को एक ऐसे शख्स की हवस का शिकार होने की वजह से खो दिया, जिसे लोग धर्मगुरु और कथावाचक मानकर सम्मान देते थे। 10 जून की रात छिंदवाड़ा में दमुआ के हनुमानगढ़ मंदिर के भीतर जो हुआ, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। दैनिक भास्कर को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, खुद को ‘शर्मा मह
Source: Bhaskar
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