लोकतंत्र की कसौटी या नया धंधा? आरटीआई कार्यकर्ताओं पर सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणियों ने छेड़ी 'नागरिक सक्रियता' पर देशव्यापी बहस
एक जीवंत और संवैधानिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर संस्था से यह उम्मीद की जाती है कि वह पूरी निष्पक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करे। लेकिन जब सरकारी तंत्र अपनी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता, तब "नागरिक सक्रियता" (Citizen Activism) ही व्यवस्था को आईना दिखाने का काम करती है। हाल ही में भारत के उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) द्वारा दो अलग-अलग मामलों की सुनवाई के दौरान आरटीआई कार्यकर्ताओं (RTI Activists) पर की गई तल्ख और तंजभरी टिप्पणियों ने न्यायपालिका बनाम नागरिक अधिकारो

एक जीवंत और संवैधानिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर संस्था से यह उम्मीद की जाती है कि वह पूरी निष्पक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करे। लेकिन जब सरकारी तंत्र अपनी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता, तब "नागरिक सक्रियता" (Citizen Activism) ही व्यवस्था को आईना दिखाने का काम करती है। हाल ही में भारत के उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) द्वारा दो अलग-अलग मामलों की सुनवाई के दौरान आरटीआई कार्यकर्ताओं (RTI Activists) पर की गई तल्ख और तंजभरी टिप्पणियों ने न्यायपालिका बनाम नागरिक अधिकारो
Source: Ni News India
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