रावण की मृत्यु के बाद सीता की मददगार त्रिजटा का क्या हुआ? जानकी से क्या मिले वरदान, कहां है राक्षसी का मंदिर
Ramayana Facts: वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस... दोनों ही ग्रंथों में एक ऐसी रहस्यमयी और करुणामयी पात्र का उल्लेख मिलता है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. रामलीला मंचन में भी यह प्रसंग नहीं दिखाया जाता है. यह पात्र है त्रिजटा, जो लंका की राक्षसी होते हुए भी धर्म और करुणा की प्रतीक मानी जाती हैं. त्रिजटा राक्षसी को रावण ने प्रमुख गार्ड के रूप में वहां रखा था. अशोक वाटिका में माता सीता के सबसे कठिन समय में त्रिजटा ही वह सहारा बनीं, जिन्होंने न सिर्फ उन्हें ढांढस बंधाया, बल्कि अपने स्वप्न के

Ramayana Facts: वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस... दोनों ही ग्रंथों में एक ऐसी रहस्यमयी और करुणामयी पात्र का उल्लेख मिलता है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. रामलीला मंचन में भी यह प्रसंग नहीं दिखाया जाता है. यह पात्र है त्रिजटा, जो लंका की राक्षसी होते हुए भी धर्म और करुणा की प्रतीक मानी जाती हैं. त्रिजटा राक्षसी को रावण ने प्रमुख गार्ड के रूप में वहां रखा था. अशोक वाटिका में माता सीता के सबसे कठिन समय में त्रिजटा ही वह सहारा बनीं, जिन्होंने न सिर्फ उन्हें ढांढस बंधाया, बल्कि अपने स्वप्न के
Source: Inkhabar
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