रसरंग में मायथोलॉजी:जब मानसून ने बदल दी भारत की सभ्यता और संस्कृति
कुछ हजार वर्ष पहले आर्य हिमालय के उत्तर में स्थित क्षेत्र से भारत आए। उस क्षेत्र तक मानसूनी वर्षा नहीं पहुंचती थी। इसलिए भारत आने से पहले वे वर्ष को अयनांत और विषुव के आधार पर चार भागों में विभाजित करते थे। वैदिक स्तोत्रों में उल्लेख मिलता है कि शीत ऋतु में लंबे समय तक सूर्य क्षितिज के ऊपर दिखाई नहीं देता था। अन्य स्तोत्रों में उषस् नामक देवी के रूप में भोर को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। उषस् वसंत ऋतु में आकाश में दिखाई देती थीं, लेकिन सूर्योदय केवल ग्रीष्म ऋतु में होने देती थीं। उत्तर भारत म
कुछ हजार वर्ष पहले आर्य हिमालय के उत्तर में स्थित क्षेत्र से भारत आए। उस क्षेत्र तक मानसूनी वर्षा नहीं पहुंचती थी। इसलिए भारत आने से पहले वे वर्ष को अयनांत और विषुव के आधार पर चार भागों में विभाजित करते थे। वैदिक स्तोत्रों में उल्लेख मिलता है कि शीत ऋतु में लंबे समय तक सूर्य क्षितिज के ऊपर दिखाई नहीं देता था। अन्य स्तोत्रों में उषस् नामक देवी के रूप में भोर को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। उषस् वसंत ऋतु में आकाश में दिखाई देती थीं, लेकिन सूर्योदय केवल ग्रीष्म ऋतु में होने देती थीं। उत्तर भारत म
Source: Bhaskar
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