मानसून में बढ़ता है आंखों और स्किन इंफेक्शन का खतरा:गंदे हाथों से न छुएं चेहरा; एक्सपर्ट से जानें बचाव के आसान टिप्स
मानसून में हवा में नमी का स्तर 70 से 90% तक पहुंच जाता है। बढ़ी हुई नमी, पसीने, गीले कपड़े और आसपास पानी जमा रहने से बैक्टीरिया, वायरस व फंगस ज्यादा पनपते हैं। इसका असर त्वचा और आंखों पर ज्यादा पड़ता है, जिससे फंगल इन्फेक्शन और मुहांसे बढ़ जाते हैं। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन, अमेरिका की रिसर्च के मुताबिक इस मौसम में आई इन्फेक्शन के मामले 2.5 तक गुना बढ़ सकते हैं। आई इन्फेक्शन ये समस्याएं सबसे आम मानसून में आंख आना यानी कंजंक्टिवाइटिस के मामले बढ़ जाते हैं। इसमें आंखें लाल, पानी आना, खुजली और जल
मानसून में हवा में नमी का स्तर 70 से 90% तक पहुंच जाता है। बढ़ी हुई नमी, पसीने, गीले कपड़े और आसपास पानी जमा रहने से बैक्टीरिया, वायरस व फंगस ज्यादा पनपते हैं। इसका असर त्वचा और आंखों पर ज्यादा पड़ता है, जिससे फंगल इन्फेक्शन और मुहांसे बढ़ जाते हैं। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन, अमेरिका की रिसर्च के मुताबिक इस मौसम में आई इन्फेक्शन के मामले 2.5 तक गुना बढ़ सकते हैं। आई इन्फेक्शन ये समस्याएं सबसे आम मानसून में आंख आना यानी कंजंक्टिवाइटिस के मामले बढ़ जाते हैं। इसमें आंखें लाल, पानी आना, खुजली और जल
Source: Bhaskar
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