भोजपुरी अस्मिता का पहला शंखनाद : 'गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो'
राजेश कुमार सिन्हा भारतीय सिनेमा का इतिहास केवल फिल्मों का इतिहास नहीं है, बल्कि यह भारतीय समाज की सांस्कृतिक स्मृतियों, भाषाई विविधताओं और सामाजिक परिवर्तनों का भी जीवंत दस्तावेज़ है. यदि हिंदी सिनेमा ने राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय जनमानस की आकांक्षाओं को स्वर दिया, तो क्षेत्रीय भाषाओं के सिनेमा ने उन सांस्कृतिक संसारों को अभिव्यक्ति दी जो अपनी-अपनी मिट्टी, बोली, परंपरा और जीवन-दृष्टि के साथ सदियों से जीवित थे. इन्हीं क्षेत्रीय सिनेमाई धाराओं में भोजपुरी सिनेमा का जन्म एक ऐतिहासिक घटना थी. इस जन्म

राजेश कुमार सिन्हा भारतीय सिनेमा का इतिहास केवल फिल्मों का इतिहास नहीं है, बल्कि यह भारतीय समाज की सांस्कृतिक स्मृतियों, भाषाई विविधताओं और सामाजिक परिवर्तनों का भी जीवंत दस्तावेज़ है. यदि हिंदी सिनेमा ने राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय जनमानस की आकांक्षाओं को स्वर दिया, तो क्षेत्रीय भाषाओं के सिनेमा ने उन सांस्कृतिक संसारों को अभिव्यक्ति दी जो अपनी-अपनी मिट्टी, बोली, परंपरा और जीवन-दृष्टि के साथ सदियों से जीवित थे. इन्हीं क्षेत्रीय सिनेमाई धाराओं में भोजपुरी सिनेमा का जन्म एक ऐतिहासिक घटना थी. इस जन्म
Source: Palpal India
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