भारत-चीन संबंधों में भाषाई आदान-प्रदान का महत्व
भारत के राजदूत विक्रम दुरईस्वामी ने चीन में भाषाई ज्ञानवर्धन और विचारों के आदान-प्रदान के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बीजिंग फॉरेन स्टडीज यूनिवर्सिटी में छात्रों के साथ संवाद करते हुए बताया कि कैसे यह आदान-प्रदान दोनों देशों के संबंधों को समृद्ध करता है। दुरईस्वामी ने मौर्य काल से आधुनिक युग तक के उदाहरणों के माध्यम से इस बात को स्पष्ट किया कि कैसे ज्ञान और संस्कृति का आदान-प्रदान दोनों सभ्यताओं के लिए लाभकारी रहा है।

भारत के राजदूत विक्रम दुरईस्वामी ने चीन में भाषाई ज्ञानवर्धन और विचारों के आदान-प्रदान के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बीजिंग फॉरेन स्टडीज यूनिवर्सिटी में छात्रों के साथ संवाद करते हुए बताया कि कैसे यह आदान-प्रदान दोनों देशों के संबंधों को समृद्ध करता है। दुरईस्वामी ने मौर्य काल से आधुनिक युग तक के उदाहरणों के माध्यम से इस बात को स्पष्ट किया कि कैसे ज्ञान और संस्कृति का आदान-प्रदान दोनों सभ्यताओं के लिए लाभकारी रहा है।
Source: Newzfatafat
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