'बालिग को अपनी मर्जी से जीने का पूरा हक':जबलपुर हाईकोर्ट का फैसला- अदालतें अभिभावक नहीं बन सकतीं
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने वयस्कता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने स्पष्ट किया कि बालिग व्यक्ति को अपनी पसंद की जगह पर रहने और अपनी मर्जी के व्यक्ति के साथ जीवन बिताने का पूरा संवैधानिक अधिकार है। यह मामला जबलपुर के रांझी क्षेत्र की एक मां द्वारा दायर 'बंदी प्रत्यक्षीकरण' (Habeas Corpus) याचिका से संबंधित था। मां ने आरोप लगाया था कि रितिक चौधरी नामक युवक उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर ले गया है। याचिका पर स
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने वयस्कता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने स्पष्ट किया कि बालिग व्यक्ति को अपनी पसंद की जगह पर रहने और अपनी मर्जी के व्यक्ति के साथ जीवन बिताने का पूरा संवैधानिक अधिकार है। यह मामला जबलपुर के रांझी क्षेत्र की एक मां द्वारा दायर 'बंदी प्रत्यक्षीकरण' (Habeas Corpus) याचिका से संबंधित था। मां ने आरोप लगाया था कि रितिक चौधरी नामक युवक उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर ले गया है। याचिका पर स
Source: Bhaskar
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