प्रधानमंत्री जन धन योजना: निष्क्रिय खातों की बढ़ती संख्या पर चिंता
प्रधानमंत्री जन धन योजना, जो वित्तीय समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, अब निष्क्रिय खातों की बढ़ती संख्या से जूझ रही है। 2026 तक, 15.32 करोड़ खाते निष्क्रिय हो चुके हैं, जो चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रवासी श्रमिकों की वजह से और वित्तीय साक्षरता की कमी के कारण यह समस्या बढ़ रही है। इस योजना में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी है, लेकिन खातों को सक्रिय बनाए रखना एक चुनौती है। जानें इस समस्या के पीछे के कारण और संभावित समाधान।

प्रधानमंत्री जन धन योजना, जो वित्तीय समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, अब निष्क्रिय खातों की बढ़ती संख्या से जूझ रही है। 2026 तक, 15.32 करोड़ खाते निष्क्रिय हो चुके हैं, जो चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रवासी श्रमिकों की वजह से और वित्तीय साक्षरता की कमी के कारण यह समस्या बढ़ रही है। इस योजना में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी है, लेकिन खातों को सक्रिय बनाए रखना एक चुनौती है। जानें इस समस्या के पीछे के कारण और संभावित समाधान।
Source: Newzfatafat
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