'पिताजी भूखे मर गए, घर में खाने को नहीं था':2 दिन डेड बॉडी के साथ रही पत्नी, चंदे से अंतिम संस्कार, पढ़िए बेटी का दर्द
"पिताजी भूख से छटपटा कर मर गए। घर में खाने के लिए कुछ भी नहीं था, इसलिए मां राशन लाने मौसी के घर गई थीं। जब वह वहां से लौटीं तो पिताजी खाट पर मरे पड़े थे। पड़ोसियों से बॉडी चेक करने के लिए कहा, लेकिन किसी ने उन्हें छूना भी नहीं चाहा। बाद में जब शव से बदबू आने लगी, तब लोगों ने आनन-फानन में उनका अंतिम संस्कार करा दिया।" खगड़िया में 55 वर्षीय मन्नू साह की बेटी ने भास्कर से बातचीत में अपने पिता की मौत को लेकर यह जानकारी दी। बुधवार को अपने पिता की मौत के बाद वो उत्तर प्रदेश के बरेली से खगड़िया सदर प्
"पिताजी भूख से छटपटा कर मर गए। घर में खाने के लिए कुछ भी नहीं था, इसलिए मां राशन लाने मौसी के घर गई थीं। जब वह वहां से लौटीं तो पिताजी खाट पर मरे पड़े थे। पड़ोसियों से बॉडी चेक करने के लिए कहा, लेकिन किसी ने उन्हें छूना भी नहीं चाहा। बाद में जब शव से बदबू आने लगी, तब लोगों ने आनन-फानन में उनका अंतिम संस्कार करा दिया।" खगड़िया में 55 वर्षीय मन्नू साह की बेटी ने भास्कर से बातचीत में अपने पिता की मौत को लेकर यह जानकारी दी। बुधवार को अपने पिता की मौत के बाद वो उत्तर प्रदेश के बरेली से खगड़िया सदर प्
Source: Bhaskar
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