न कोर्ट, न कचहरी... तेलंगाना के इस पत्थर के सामने नहीं बोला जाता झूठ, आज भी यहीं सुलझते हैं झगड़े
Boddu Rai Tradition: तेलंगाना के गाँवों में आज भी डिजिटल युग के बीच 'बोड्डू राय' (नाभि-पत्थर) परंपरा जीवित है. यह गोल पत्थर गाँव के केंद्र में स्थापित होता है, जिसे न्याय और सीमाओं का रक्षक माना जाता है. ग्रामीण विवादों के निपटारे के लिए इसके पास चौपाल लगती है, जहाँ कोई झूठ नहीं बोलता. बतुकम्मा और बोनालु जैसे त्योहारों की पहली पूजा यहीं होती है, जो समाज को आपस में जोड़े रखता है.

Boddu Rai Tradition: तेलंगाना के गाँवों में आज भी डिजिटल युग के बीच 'बोड्डू राय' (नाभि-पत्थर) परंपरा जीवित है. यह गोल पत्थर गाँव के केंद्र में स्थापित होता है, जिसे न्याय और सीमाओं का रक्षक माना जाता है. ग्रामीण विवादों के निपटारे के लिए इसके पास चौपाल लगती है, जहाँ कोई झूठ नहीं बोलता. बतुकम्मा और बोनालु जैसे त्योहारों की पहली पूजा यहीं होती है, जो समाज को आपस में जोड़े रखता है.
Source: News 18 Hindi
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