तीन साल बाद आया पितरों की मुक्ति का दुर्लभ अवसर, अधिक मास की अमावस्या पर बन रहा विशेष संयोग
ज्येष्ठ अधिक मास अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और इसके साथ ही एक ऐसा दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है, जिसे पितरों की शांति, तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस वर्ष अधिक मास की अमावस्या 14 जून को पड़ रही है, जबकि 15 जून को उदया तिथि के कारण अमावस्या का प्रभाव रहेगा। विशेष बात यह है कि इस बार अमावस्या सोमवार के दिन होने से सोमवती अमावस्या का दुर्लभ योग भी बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह अवसर लगभग तीन वर्ष में एक बार प्राप्त होता है और इस दिन किए गए श्राद्ध, तर

ज्येष्ठ अधिक मास अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और इसके साथ ही एक ऐसा दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है, जिसे पितरों की शांति, तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस वर्ष अधिक मास की अमावस्या 14 जून को पड़ रही है, जबकि 15 जून को उदया तिथि के कारण अमावस्या का प्रभाव रहेगा। विशेष बात यह है कि इस बार अमावस्या सोमवार के दिन होने से सोमवती अमावस्या का दुर्लभ योग भी बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह अवसर लगभग तीन वर्ष में एक बार प्राप्त होता है और इस दिन किए गए श्राद्ध, तर
Source: Palpal India
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