जब डर पीछे छूटने लगा... नक्सलवाद के बाद बदलते इलाकों की कहानी
छत्तीसगढ़ के बस्तर, दंतेवाड़ा और जगदलपुर में नक्सलवाद के प्रभाव के बाद बदलती तस्वीर अब सुरक्षा अभियानों से आगे बढ़कर सामान्य जीवन, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, कौशल प्रशिक्षण और पर्यटन में दिखाई दे रही है. नेतानार के सीआरपीएफ कैंप में ग्रामीणों के लिए खुली सुविधाएं, दंतेवाड़ा में पूर्व नक्सलियों का कौशल प्रशिक्षण और चित्रकोट-तीरथगढ़ जैसे पर्यटन स्थलों पर लौटते पर्यटक इस बदलाव के अहम संकेत हैं. यहां अब बंदूक और डर की पहचान धीरे-धीरे बैंकिंग, रोजगार, हुनर और उम्मीद में बदल रही है.

छत्तीसगढ़ के बस्तर, दंतेवाड़ा और जगदलपुर में नक्सलवाद के प्रभाव के बाद बदलती तस्वीर अब सुरक्षा अभियानों से आगे बढ़कर सामान्य जीवन, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, कौशल प्रशिक्षण और पर्यटन में दिखाई दे रही है. नेतानार के सीआरपीएफ कैंप में ग्रामीणों के लिए खुली सुविधाएं, दंतेवाड़ा में पूर्व नक्सलियों का कौशल प्रशिक्षण और चित्रकोट-तीरथगढ़ जैसे पर्यटन स्थलों पर लौटते पर्यटक इस बदलाव के अहम संकेत हैं. यहां अब बंदूक और डर की पहचान धीरे-धीरे बैंकिंग, रोजगार, हुनर और उम्मीद में बदल रही है.
Source: Aaj Tak
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