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Uttar Pradesh

गोपालदास 'नीरज': दर्द को गीतों में पिरोकर अमर हो गए शब्दों के जादूगर

नई दिल्ली, 18 जुलाई (आईएएनएस)। 4 जनवरी 1925 को उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के पुरावली गांव में जन्मे गोपालदास सक्सेना उर्फ 'नीरज' का शुरुआती जीवन तंगहाली में गुजरा। मात्र 6 वर्ष की उम्र में पिता का साया सिर से उठ जाने के कारण उन पर परिवार की जिम्मेदारी आ गई। घर का चूल्हा जलाने के लिए उन्होंने पेट की खातिर गंगा नदी में गोता लगाकर श्रद्धालुओं द्वारा फेंके गए सिक्के बटोरे, गलियों में घूम-घूमकर बीड़ी-सिगरेट बेची और यहां तक कि दीवारों पर फिल्मों के पोस्टर भी चिपकाए। उन्होंने शायद ही कभी सोचा होगा कि ए

ians july18 Jul 2026, 09:15👁 0 views
गोपालदास 'नीरज': दर्द को गीतों में पिरोकर अमर हो गए शब्दों के जादूगर
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नई दिल्ली, 18 जुलाई (आईएएनएस)। 4 जनवरी 1925 को उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के पुरावली गांव में जन्मे गोपालदास सक्सेना उर्फ 'नीरज' का शुरुआती जीवन तंगहाली में गुजरा। मात्र 6 वर्ष की उम्र में पिता का साया सिर से उठ जाने के कारण उन पर परिवार की जिम्मेदारी आ गई। घर का चूल्हा जलाने के लिए उन्होंने पेट की खातिर गंगा नदी में गोता लगाकर श्रद्धालुओं द्वारा फेंके गए सिक्के बटोरे, गलियों में घूम-घूमकर बीड़ी-सिगरेट बेची और यहां तक कि दीवारों पर फिल्मों के पोस्टर भी चिपकाए। उन्होंने शायद ही कभी सोचा होगा कि ए

Source: Ians Live

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