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क्या सचमुच खत्म हो गया घड़ी? मोबाइल के दौर में सिमट गया वक्त का कारोबार

दरभंगा/सीतामढ़ी। एक समय था जब किसी भी शहर या कस्बे के मुख्य बाजार में घड़ियों का अलग शोरूम हुआ करता था। नई घड़ी खरीदना केवल जरूरत नहीं, बल्कि एक शौक और प्रतिष्ठा की बात मानी जाती थी। स्कूल में अच्छे अंक आने पर माता-पिता बच्चों को घड़ी उपहार में देते थे। नौकरी लगने पर पहली सैलरी से घड़ी खरीदना कई युवाओं का सपना होता था। शादी-ब्याह और त्योहारों पर भी घड़ी सबसे पसंदीदा उपहारों में शामिल रहती थी। लेकिन आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। अगर आप किसी बाजार में घड़ी की दुकान ढूंढने निकलें, तो शायद काफी दे

mithla hindi news11 Jul 2026, 00:56👁 0 views
क्या सचमुच खत्म हो गया घड़ी? मोबाइल के दौर में सिमट गया वक्त का कारोबार
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दरभंगा/सीतामढ़ी। एक समय था जब किसी भी शहर या कस्बे के मुख्य बाजार में घड़ियों का अलग शोरूम हुआ करता था। नई घड़ी खरीदना केवल जरूरत नहीं, बल्कि एक शौक और प्रतिष्ठा की बात मानी जाती थी। स्कूल में अच्छे अंक आने पर माता-पिता बच्चों को घड़ी उपहार में देते थे। नौकरी लगने पर पहली सैलरी से घड़ी खरीदना कई युवाओं का सपना होता था। शादी-ब्याह और त्योहारों पर भी घड़ी सबसे पसंदीदा उपहारों में शामिल रहती थी। लेकिन आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। अगर आप किसी बाजार में घड़ी की दुकान ढूंढने निकलें, तो शायद काफी दे

Source: Mithila Hindi News

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