कहानी नायक जदुनाथ सिंह की, सीने और सिर पर खाई गोली, फिर भी छुड़ाए पाकिस्तान के छक्के
कहानी 1948 में नौशेरा के तैन धार मोर्चे पर लगातार दुश्मन के हमलों को नाकाम करने वाले नायक जदुनाथ सिंह की वीरता की. उन्होंने सिर और सीने में गोली खाने के बाद भी अपनी अंतिम सांस तक दुश्मनों का सामना किया और उनके छक्के छुड़ा दिए. इतना ही नहीं द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वह ब्रिटिश भारतीय सेना की राजपूत रेजीमेंट का हिस्सा रहे और बर्मा के मोर्चे पर जापानी सेना के खिलाफ लड़ाई लड़ी.
कहानी 1948 में नौशेरा के तैन धार मोर्चे पर लगातार दुश्मन के हमलों को नाकाम करने वाले नायक जदुनाथ सिंह की वीरता की. उन्होंने सिर और सीने में गोली खाने के बाद भी अपनी अंतिम सांस तक दुश्मनों का सामना किया और उनके छक्के छुड़ा दिए. इतना ही नहीं द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वह ब्रिटिश भारतीय सेना की राजपूत रेजीमेंट का हिस्सा रहे और बर्मा के मोर्चे पर जापानी सेना के खिलाफ लड़ाई लड़ी.
Source: State Mirror Hindi
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