Breaking
Bihar Weather Today: 25 जिलों में बारिश और ठनका का येलो अलर्ट, पटना समेत अन्य शहरों का जानें हालNeeraj Chopra Match LIVE Streaming: नीरज चोपड़ा ही नहीं भारत को जैवलिन में 3 पदक की उम्मीद, जानें कब-कहां देख पाएंगे मुकाबलाएक लाख मछली पकड़ने वाले जहाजों में लगेंगे ट्रांसपोंडर, सीमा पार करने से पहले अलर्ट देगा नया सिस्टमएक लाख मछली पकड़ने वाले जहाजों में लगेंगे ट्रांसपोंडर, सीमा पार करने से पहले अलर्ट देगा नया सिस्टमस्वतंत्रता दिवस से पहले गुरुग्राम में अलर्ट, धारा 163 लागू; ड्रोन-पतंग उड़ाने पर रोकनवोदय विद्यालय अलर्ट! कक्षा 6 में एडमिशन की आखिरी तारीख आज, जानें कौन कर सकता है अप्लाई और क्या है प्रक्रियाBihar Weather Today: 25 जिलों में बारिश और ठनका का येलो अलर्ट, पटना समेत अन्य शहरों का जानें हालNeeraj Chopra Match LIVE Streaming: नीरज चोपड़ा ही नहीं भारत को जैवलिन में 3 पदक की उम्मीद, जानें कब-कहां देख पाएंगे मुकाबलाएक लाख मछली पकड़ने वाले जहाजों में लगेंगे ट्रांसपोंडर, सीमा पार करने से पहले अलर्ट देगा नया सिस्टमएक लाख मछली पकड़ने वाले जहाजों में लगेंगे ट्रांसपोंडर, सीमा पार करने से पहले अलर्ट देगा नया सिस्टमस्वतंत्रता दिवस से पहले गुरुग्राम में अलर्ट, धारा 163 लागू; ड्रोन-पतंग उड़ाने पर रोकनवोदय विद्यालय अलर्ट! कक्षा 6 में एडमिशन की आखिरी तारीख आज, जानें कौन कर सकता है अप्लाई और क्या है प्रक्रिया
Uttar Pradesh

कजरी में झरती है श्रद्धा, विरह और लोकआस्था की रिमझिम: सुरेश गांधी

जब आकाश पर सावन की पहली बदरी उतरती है, तब केवल मौसम नहीं बदलता, भारतीय मानस की धड़कन भी बदल जाती है। मिट्टी की सोंधी गंध, आम की डालियों पर पड़े झूले, आंगन में लौटती बेटियां और चौपालों से उठती कजरी-ये सब मिलकर उस सांस्कृतिक संसार का निर्माण करते हैं, जिसकी जड़ें हजारों वर्षों पुरानी लोक परंपराओं में हैं। आज महानगरों की चकाचौंध और डिजिटल संगीत के शोर के बीच भी कजरी का स्वर इसलिए जीवित है, क्योंकि वह मनुष्य और प्रकृति के बीच के आत्मीय संवाद को बचाए रखता है। कजरी में वर्षा का संगीत है, खेतों की हरिय

harshit31 Jul 2026, 07:46👁 0 views
कजरी में झरती है श्रद्धा, विरह और लोकआस्था की रिमझिम: सुरेश गांधी
Advertisement

जब आकाश पर सावन की पहली बदरी उतरती है, तब केवल मौसम नहीं बदलता, भारतीय मानस की धड़कन भी बदल जाती है। मिट्टी की सोंधी गंध, आम की डालियों पर पड़े झूले, आंगन में लौटती बेटियां और चौपालों से उठती कजरी-ये सब मिलकर उस सांस्कृतिक संसार का निर्माण करते हैं, जिसकी जड़ें हजारों वर्षों पुरानी लोक परंपराओं में हैं। आज महानगरों की चकाचौंध और डिजिटल संगीत के शोर के बीच भी कजरी का स्वर इसलिए जीवित है, क्योंकि वह मनुष्य और प्रकृति के बीच के आत्मीय संवाद को बचाए रखता है। कजरी में वर्षा का संगीत है, खेतों की हरिय

Source: Tarun Mitra

Advertisement

Related News