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आतंक का साया हटा तो छाए मेधावी: लिखी सफलता की नई इबारत, सम्मान मिला, तस्वीरें खिंची, चेहरे खिले; गूंजी तालियां
एक दौर था जब शोपियां, कुपवाड़ा, बांदीपोरा और अनंतनाग के कई गांवों में सुबह की शुरुआत स्कूल की घंटी से नहीं बल्कि गोलियों की आवाज और बंद के एलान से होती थी। आतंकियों के डर से स्कूलों के दरवाजे बंद हो जाते थे।
sharukh khan22 Jun 2026, 21:50👁 0 views

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एक दौर था जब शोपियां, कुपवाड़ा, बांदीपोरा और अनंतनाग के कई गांवों में सुबह की शुरुआत स्कूल की घंटी से नहीं बल्कि गोलियों की आवाज और बंद के एलान से होती थी। आतंकियों के डर से स्कूलों के दरवाजे बंद हो जाते थे।
Source: Amar Ujala
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